Tuesday, 21 February 2017

Friday, 2 December 2016


यूँ पलके बिछा कर तेरा इंतज़ार करते है,
यह वो गुनाह है जो हम बार बार करते है,
जलाकर हसरत की राह पर चिराग,
हम सुबह और शाम तेरे मिलने का इंतज़ार करते है.


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प्यार क्या होता है हम नहीं जानते,
ज़िन्दगी को हम अपना नहीं मानते,
गम इतने मील के एहसास नहीं होता,
कोई हमें प्यार करे अब विश्वास नहीं होता.....
Ashish Ranjan @Chhath Puja, Dehri

Monday, 10 October 2016

आशिष रंजन 



अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

Saturday, 8 October 2016


एक मुट्ठी आसमान चाहिए ....


यहाँ सफ़र कैसा भी हो,
सभी को रास्ता एक, आसान चाहिए !

यहाँ मंजिल कैसी भी हो, 
लोगो को तो बस एक, पहचान चाहिए !

सोने वाले सपनों से थक कर सो गए ,
अब हर किसी को महल एक, आलिशान चाहिए !

कोशिश तो करते है सब अपने लिए  जीने की,
पर यहाँ जीने के लिए भी, एक मुट्ठी आसमान चाहिए !